वो आदमी नहीं मुक्कमल बयान है Do Beegha Zameen 1953

हो जाये अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहाँ।खाते, खवाई, बीज ऋण से हैं रंगे रक्खे जहाँ॥आता महाजन के

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