हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां है

“बाबू मोशाय, हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां है, जिसकी डोर ऊपर वाले के हाथ में है, कौन कब कहां उठेगा, कोई नहीं जानता।”

ऋषिकेश मुखर्जी के इस क्लासिक चलचित्र में फिल्म का नायक आनंद सहगल है जो आँतों के कैंसर ( लिम्फोसर्कोमा ऑफ इंटेस्टाइन ) से पीड़ित है लेकिन इस लाइलाज बिमारी से जूझने की पीड़ा कभी उसके चेहरे पर नहीं दिखाई पड़ती. किसी भी पल आ सकने वाली मृत्यु से जूझता हुआ आनंद अपने प्रत्येक संवाद में हमें जीने का सलीका सिखाता जाता है. राजेश खन्ना नें आनंद की भूमिका को डूबकर जिया है; आनंद एक ऐसा किरदार है जो हाथों से छूटती हुई जिन्दगी को बोझिल नहीं होने देता वह उसके एक एक पल का आस्वाद लेता है.आनंद जीवन को पूरे उत्साह से जीता है इसलिए चुनौती से भरी हुई जिन्दगी उसके लिए एक उत्सव बन जाती है. आनंद के संवाद, इसका गीत-संगीत और धुनें सब कुछ एक शानदार लय में है .


आपको सुनकर आश्चर्य होगा की राजेश खन्ना से पहले ऋषिकेश मुखर्जी नें आनंद के किरदार के लिए शशि कपूर, राज कपूर और किशोर कुमार अप्रोच किया लेकिन किसी न किसी वजह से बात टलती गयी और अंतिम रूप से आनंद की भूमिका राजेश खन्ना नें और सहायक अभिनेता के रूप में डाक्टर भास्कर की भूमिका अमिताभ बच्चन ने निभाई. हाल ही में फिल्म में रेनू ( भास्कर की प्रेमिका) का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री सुमिता सान्याल का निधन हुआ है . फिल्म में उनकी छोटी लेकिन प्रभावी भूमिका थी. सौम्य सी दिखने वाली सुमिता नें ‘मेरे अपने’, ‘गुड्डी’ और ‘आशीर्वाद’ सरीखी हिंदी फिल्मों में भी काम किया था, वे मूल रूप से बंगाली सिनेमा से जुडी हुई थीं.

फिल्म की शुरुआत ‘आनंद’ नाम की किताब के लोकार्पण से होती है जिसे डाक्टर भास्कर ने लिखा है . धीरे-धीरे किताब के पृष्ठ अनावृत होते हैं और आनंद हमारे मन में बैठता चला जाता है . आनंद सहगल कहानी का नायक है जिसकी मुलाकात अपनी जिंदगी के बचे हुए आखिरी पलों में डॉक्टर भास्कर बनर्जी (अमिताभ बच्चन) से मुंबई के एक क्लिनिक में होती है। हमेशा गंभीर रहने वाला भास्कर आनंद से मिलकर जिंदगी के नए मायने सीखता है. जिंदादिल नायक आनंद की कभी भी आ सकने वाली मृत्यु के सामने फिल्म का हर एक किरदार विवश नजर आता है.

आनंद जीवन को इतने विशाल कैनवास पर जीता है कि उसकी मौत के बाद उसका अजीज़ दोस्त भास्कर अंत में कहता है – “आनंद मरा नहीं, आनंद मरते नहीं।”आनंद राजेश खन्ना के फ़िल्मी करियर की सबसे बेहतरीन चलचित्रों में एक है, उनकी संवाद अदायगी, मर्मस्पर्शी अभिनय और बेहतरीन गीत-संगीत ने इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की अनमोल धरोहर बना दिया। आपके जो भी मित्र या परिवार के सदस्य किन्ही वजहों से जीवन की उम्मीद छोड़ चुके हैं या अवसाद से जूझ रहे हैं आपको उन्हें यह फिल्म जरूर दिखानी चाहिए, क्या मालूम कब कोई बात असर कर जाए. ‘आनंद’ जिन्दगी का उत्सव है आप सभी को यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए 

pic credit google

Matinee Box Desk

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