नीली आँखों वाला अभिनेता ‘डी.के.सप्रू’

अदा है, ख्वाब है, तकसीम है, तमाशा है, तेरी इन आँखों में एक शख्स बेतहाशा है।

हमारी फिल्मी दुनिया दिलचस्प कहानियों से भरी हुई है। कहानियों का दौर कोई भी रहा हो जब हम उन्हें सुनते हैं तो उन दास्तानों में ठहरा हुआ वक़्त हमारी नसों में घुलने लगता है। दोस्तों बात 1944 की है अंग्रेज़ों का जमाना था। प्रभावशाली व्यक्तित्व और ऊंचे कद वाला एक कश्मीरी नौजवान दयाकिशन फ़िल्मों में अपनी किस्मत आजमाने के लिए मुंबई आया। वी. शांताराम ने उसे मिलने के लिए प्रभात स्टूडियो बुलाया। जब उस नौजवान ने बोलना शुरू किया तो वी. शांताराम मंत्रमुग्ध होकर उनकी गरजदार आवाज़ को सुनते रहे। शांताराम ने नीली आंखों वाले उस लड़के से कहा – कि ‘तुम बिल्कुल किसी यूरोपियन की तरह लगते हो’। इसका नतीजा यह हुआ की वी. शांताराम ने अपनी फ़िल्म ‘राम-शास्त्री’ के लिए दयाकिशन को चुन लिया। यही दयाकिशन आगे चलकर डी. के. ‘सप्रू’ के रूप में मशहूर हुए। आप जानते हैं! सप्रू अपने समय नें सर्वाधिक भुगतान पाने वाले अभिनेता थे।

सप्रू साहब ने हम हिंदुस्तानी, साहब बीवी और गुलाम, लीडर, शहीद, ज्वेल थीफ़, जंजीर और पाकीज़ा जैसी लाज़वाब फिल्मों को अपने दमदार अभिनय से संवारा। सप्रू साहब के बारे में एक और दिलचस्प बात आपको बताता चलूं, उन्हें होमियोपैथी की अच्छी जानकारी थी और वे जरूरतमंद लोगों को इसे बगैर किसी शुल्क दिया करते थे। फिल्म और टेलीविजन कलाकार तेज सप्रू इन्हीं के पुत्र हैं. हिंदी और पंजाबी फिल्म अभिनेत्री प्रीति सप्रू और स्क्रीनराइटर रीमा राकेश नाथ दोनों उन्हीं की बेटियां हैं।

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मैटिनी बॉक्स डेस्क

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